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इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ घर के गैरेज से ऑनलाइन बेचने लगीं मसाले, 20 लाख रु टर्नओवर, अमेरिका-कनाडा से भी मिले ऑर्डर

इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ घर के गैरेज से ऑनलाइन बेचने लगीं मसाले, 20 लाख रु टर्नओवर, अमेरिका-कनाडा से भी मिले ऑर्डर

बेंगलुरु की रहने वाली स्नेहा सिरिवरा ने कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। एक आईटी कंपनी में उनकी जॉब भी लगी। अच्छी खासी सैलरी भी थी लेकिन, स्नेहा का मन नौकरी करने में नहीं लग रहा था। वह कुछ अपना बिजनेस करना चाहती थीं। सालभर बाद ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने घर से ही साउथ इंडियन मसालों का बिजनेस शुरू किया।

आज हर महीने 1 हजार से ज्यादा मसालों के पैकेट वो बेचती हैं, भारत के साथ-साथ अमेरिका और कनाडा में वो प्रोडक्ट सप्लाई करती हैं। वो अभी 20 लाख रुपए सालाना कमा रही हैं। स्नेहा कहती हैं, 'मेरे कुछ रिश्तेदार दूसरे राज्यों में रहते हैं, अक्सर उनकी शिकायत रहती थी कि उन्हें साउथ इंडियन मसाले नहीं मिलते हैं। अगर किसी स्टोर या दुकान पर कुछ मसाले मिलते भी हैं तो उनमें न तो स्वाद होता है और न ही वो खुशबू होती है जो यहां के मसालों में होती है।

स्नेहा कहती हैं कि लॉकडाउन के दौरान फिल्टर कॉफी की डिमांड खूब रही। लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं।

इसके बाद मैंने घर से ही मसाले तैयार करके कुछ पैकेट्स उन्हें कुरियर से भेजे, जो उन्हें काफी पसंद आए। इसके बाद दूसरे लोग भी मुझसे मसालों की डिमांड करने लगे। तब मुझे लगा कि इसी फिल्ड में अपना बिजनेस शुरू करना चाहिए। 2013 में मैंने नौकरी छोड़ दी।

29 साल की स्नेहा के पेरेंट्स बैंक से रिटायर्ड हैं। दोनों स्नेहा के काम में हाथ बंटाते हैं। स्नेहा कहती हैं, 'नौकरी छोड़ने के बाद मैंने मां, दादी और रिश्तेदारों में जो महिलाएं हैं, उनसे मसालों के बारे में पूछा, बेसिक काम सीखा। कौन-कौन से मसालों की डिमांड ज्यादा है और वे कैसे तैयार होते हैं, इसके बारे में जानकारी जुटाई।'

स्नेहा बताती हैं, 'मैंने 2013 में अपने घर के गैरेज से काम की शुरुआत की। वहीं, पर हम लोग प्रोडक्शन से लेकर पैकेजिंग का काम करते थे। जो मसाले हमने तैयार किए उसे कुछ लोगों को पार्सल भेज दिया फिर बाकी मसालों के लिए हम लोकल रिटेलर्स के पास गए और उन्हें अपने प्रोडक्ट के बारे में बताया। उन्हें हमारे प्रोडक्ट पसंद आए और वे लोग हमसे ऑर्डर लेने लगे। इस तरह हमारा काम बढ़ता गया और हम प्रोडक्ट की क्वांटिटी बढ़ाते गए। कुछ दिनों के बाद हमने सांभर स्टोरीज नाम से एक वेबसाइट लॉन्च की और सभी प्रोडक्ट्स उसपर अपलोड कर दिए।'

स्नेहा बताती हैं कि हमारे प्रोडक्ट 100 फीसदी नेचुरल होते हैं। हम हर चीज घर की इस्तेमाल करते हैं। मसालों के लिए रॉ मटेरियल भी गांव से मंगाते हैं ताकि कहीं से कुछ भी मिलावट वाली नहीं हो।

स्नेहा बताती हैं कि जिन रिश्तेदारों को अपना प्रोडक्ट भेजा था, उन्होंने माउथ पब्लिसिटी कर दी थी, हमें लोगों के ऑर्डर भी मिल रहे थे लेकिन इनकी संख्या कम थी। बड़े लेवल पर कस्टमर्स तक पहुंचने में हमें कुछ वक्त लगा, थोड़ी स्ट्रगल करनी पड़ी। इसके बाद हमने सोशल मीडिया की मदद ली, फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट किए। इसके बाद हमारे बिजनेस का दायरा बढ़ता गया।

कुछ दिनों बाद हमने वॉट्सऐप बिजनेस भी शुरू किया। अपना ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ने का काम किया और उस पर ऑर्डर भी लेना शुरू कर दिया। जो लोग ऑनलाइन ऑर्डर नहीं कर सकते, उनके लिए वॉट्सऐप पर ऑर्डर करना आसान हो गया, खासकर कम पढ़ी लिखी महिलाओं के लिए।

वो कहती हैं, 'जब काम का दायरा बढ़ गया तो 2018 में हमने सांभर स्टोरीज के नाम से अपनी फैक्ट्री की शुरुआत की। अभी 6-7 लोग हमारे यहां काम करते हैं। हम लोग मसाले के साथ-साथ चटनी पाउडर, पिकल पाउडर, फिल्टर कॉफी पाउडर, स्नैक्स सहित 50 प्रोडक्ट्स की सप्लाई करते हैं। इंडिया के साथ- साथ अब हम दूसरे देशों में भी प्रोडक्ट्स की सप्लाई कर रहे हैं।'

स्नेहा अभी मसाले के साथ-साथ चटनी पाउडर, पिकल पाउडर, फिल्टर कॉफी पाउडर, स्नैक्स सहित 50 प्रोडक्ट्स की सप्लाई कर रही हैं।

कोरोना और लॉकडाउन को लेकर स्नेहा कहती हैं, 'बिजनेस का फायदा हमें इस दौरान हुआ, जो लोग बाहर दुकान से सामान नहीं खरीद सकते थे वे ऑनलाइन ऑर्डर करने लगे। कई लोग तो हमारे परमानेंट कस्टमर्स बन गए हैं, वे रेगुलर हमारे प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं। सांभर पाउडर और फिल्टर कॉफी पाउडर की डिमांड इस दौरान सबसे ज्यादा रही।'

स्नेहा बताती हैं कि हमारे प्रोडक्ट 100 फीसदी नेचुरल होते हैं। हम हर चीज घर की इस्तेमाल करते हैं। मसालों के लिए रॉ मटेरियल भी गांव से मंगाते हैं ताकि कहीं से कुछ भी मिलावट नहीं हो। हम लोग इन मसालों में कोई केमिकल या प्रिजर्वेटिव्स भी ऐड नहीं करते हैं। यही हमारा यूएसपी है, जिसे लोग पसंद करते हैं।

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स्नेहा सिरिवरा कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करने के बाद मसालों का ऑनलाइन बिजनेस कर रही हैं। उनके माता-पिता भी उनके इस काम में मदद करते हैं।


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